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वलमकय रमयण म भरत वभव

International Journal of Sanskrit Research · 2026 · Vol. 12(1) · pp. 416–418

Abstract

वैदिक साहित्य से हमें वैदिककालीन भारत के विविधस्वरूप के दर्शन होते हैं। वैदिक साहित्य की रचना के बाद आदिकाव्य रामायण एक आधिकारिक शब्द प्रमाण है जो हमें तत्कालीन अखण्ड भारत के संस्कृति, सभ्यता, समाज, राजनीति, परिवार इत्यादि पक्षों के स्वरूप से परिचय कराता हुआ इसके वैभवशाली अतीत से भी हमारा साक्षात्कार कराता है। वाल्मीकीय रामायण में अयोध्यापुरी, यज्ञों, दिव्यास्त्रो, विवाह, गौ पालन, पुष्पकविमान, रावणभवन, सेतुबन्धन, राजा दशरथ की राज्यव्यवस्था, श्रीराम का आज्ञापालन, सीता की पतिभक्ति, लक्ष्मण का भातृप्रेम, सुग्रीव का भूगोलज्ञान, शवरी केवट प्रसंब, विभिन्नशकुनवर्णन, युद्धप्रबन्धन इत्यादि अनेकानेक स्थलो से तत्कालीन भारत के भौतिक सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक, पारिवारिक, बौद्धिक वैभव के सुदर्शन हमें होते है। अतः इस संबंध में वाल्मीकीय रामायण के कतिपय-स्थल पौनपुन्येन मंथन कर आलोचनीय और अनुशीलनीय है। जिससे हमारा समाज इस ग्रन्थ रूपी शब्दसागर के तŸवामृत का पान करने मे सफल होगा।

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