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भरत क परचन मनवजञन: यगदरशन क परपकषय म

Abstract

भारत की ज्ञान परम्परा विश्व की प्राचीनतम और समृद्धतम परम्परा है, जिसमें योग का विशेष महत्व है। भारतीय दर्शन में योग को आस्तिक और नास्तिक दोनों ही दर्शनों द्वारा स्वीकारा गया है और मोक्ष प्राप्ति हेतु योगिक साधना पर जोर दिया गया है। महर्षि पतंजलीकृत योग दर्शन का इसमें खास स्थान है, जो मन, बुद्धि, और अहंकार जैसे मनोवैज्ञानिक शब्दों की गहन विवेचना करता है। इस योगसूत्र पर वेद व्यासकृत व्यास भाष्य में चित्त की भूमियों का भी विस्तृत वर्णन किया गया है, जिससे इसे भारतीय परम्परा का मनोविज्ञान कहना उचित है।

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