हरयण रजय क वरषठ मधयमक सतर क वदयरथय क वजञनक दषटकण, भवनतमक बदधमतत और समजक जगरकत क परयवरणय वयवहर पर परभव क अधययन
Abstract
यह शोध हरियाणा राज्य के वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सामाजिक जागरूकता का पर्यावरणीय व्यवहार पर प्रभावों का विस्तृत अध्ययन है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि कैसे ये तीन कारक - वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सामाजिक जागरूकता विद्यार्थियों के पर्यावरणीय आचरण को प्रभावित करते हैं और किस प्रकार यह आचरण सतत विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को निर्धारित करता है।शोध के लिए सोनीपत जिले के विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों के 800 विद्यार्थियों का चयन किया गया, जिनमें 400 छात्र और 400 छात्राएं शामिल थे। इन विद्यार्थियों के पर्यावरणीय व्यवहार का आकलन करने के लिए एक मिश्रित पद्धति (गुणात्मक और मात्रात्मक) का उपयोग किया गया, जिसमें ऑनलाइन प्रश्नावली और साक्षात्कार जैसे उपकरणों से डेटा संग्रह किया गया। प्रश्नावली में बहुविकल्पीय प्रश्न, लिकर्ट स्केल प्रश्न और खुले-मदकमक उत्तर शामिल थे, जो विद्यार्थियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और सामाजिक जागरूकता के मापन पर केंद्रित थे। इस डेटा का विश्लेषण सांख्यिकीय सॉफ्टवेयर की सहायता से किया गया, जिसमें टी-टेस्ट, सहसंबंध गुणांक (ब्वततमसंजपवद बवमििपबपमदज) और ।छव्ट। (।दंसलेपे व िटंतपंदबम) जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया।अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष बताते हैं कि जिन विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अधिक विकसित होता है, वे पर्यावरणीय समस्याओं को तार्किक और व्यवस्थित रूप से समझने और समाधान खोजने की अधिक प्रवृत्ति रखते हैं। ये विद्यार्थी पर्यावरणीय संकटों के वैज्ञानिक समाधान के लिए प्रतिबद्ध होते हैं और अपने व्यवहार में तर्कसंगत निर्णय लेते हैं। उदाहरणस्वरूप, ये विद्यार्थी जल और ऊर्जा के बचत के लिए व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव करते हैं और पुनर्चक्रण, प्रदूषण नियंत्रण जैसे कदम उठाते हैं।
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