article Open Access
पणडत मधसदन ओझ वरचत वयकरणवनद म परतपदत ‘अवययभवसमस’ क अवलकन
International Journal of Humanities and Arts · 2023 · Vol. 5(2) · pp. 48–52
Abstract
आचार्य पण्डित मधुसूदन ओझा जी ने संस्कृत साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने लगभग 200 ग्रन्थों की रचना की, जिनमें से अधिकांश अनुपलब्ध हैं। उनके व्याकरणशास्त्र पर आधारित ग्रन्थ 'व्याकरणविनोद' में अव्ययीभाव समास पर गहराई से विवेचना की गई है। इस ग्रन्थ में छः प्रकरण हैं, जिनमें समास, तद्धित, नामधातु, प्रक्रिया, कृदन्त, और अव्यय परिच्छेद शामिल हैं। ओझा जी ने अव्ययीभाव समास के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण किया, जिसमें समास के भेद और अव्ययीभाव के प्रमुख लक्षणों को समझाया गया है।
Citations
0
FWCI
0.00
field-weighted impact
References
0
Percentile
41%
vs. same field & year
Citation Network
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
