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घमनत जत बजर क समजक-आरथक जवन क सतर क भगलक अधययन (रजसथन रजय क वशष सदरभ म)

Abstract

भारतीय समाज में घुमन्तू जातियों को निम्न, अशुद्ध, हीन एवं पिछड़ा माना जाता है। परम्परागत समाज व्यवस्था में इन्हें स्थान नहीं मिल पाया है, इन्हें सत्ता, सम्पति एवं शिक्षा से वंचित रखा गया है। रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत मानवीय सुविधा से यह जातियाँ वंचित रही है। उदर निर्वाह हेतु भटकन की विवशता के कारण इन्हें समाज जीवन में समन्वय का अभाव होता है। सरकार द्वारा इन जातियों को मुख्यधारा में लाने के लिए इनके शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने की पहल करनी चाहिए।

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