article Open Access
घमनत जत बजर क समजक-आरथक जवन क सतर क भगलक अधययन (रजसथन रजय क वशष सदरभ म)
International Journal of Geography Geology and Environment · 2023 · Vol. 5(2) · pp. 06–10
Abstract
भारतीय समाज में घुमन्तू जातियों को निम्न, अशुद्ध, हीन एवं पिछड़ा माना जाता है। परम्परागत समाज व्यवस्था में इन्हें स्थान नहीं मिल पाया है, इन्हें सत्ता, सम्पति एवं शिक्षा से वंचित रखा गया है। रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत मानवीय सुविधा से यह जातियाँ वंचित रही है। उदर निर्वाह हेतु भटकन की विवशता के कारण इन्हें समाज जीवन में समन्वय का अभाव होता है। सरकार द्वारा इन जातियों को मुख्यधारा में लाने के लिए इनके शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने की पहल करनी चाहिए।
Citations
0
FWCI
0.00
field-weighted impact
References
1
Percentile
40%
vs. same field & year
Citation Network
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
