जयपर शहर म नगरकरण क उसक अनषग कसब क जनसखय एव नयजत कषतरफल पर परभव क भगलक अधययन
Abstract
जयपुर शहर में नगरीकरण के कारण तीव्र जनसंख्या वृद्धि हुई है, बढ़ती हुई जनसंख्या को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए भूमि की उपलब्धता आवष्यक होती है। शहर में सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ अनुषंगी कस्बों व ग्रोथ सेंटरों में भी गुणवत्तायुक्त सुविधाओं का विकास कर षहर से जनसंख्या दबाव कम किए जाने का प्रयास किया जा रहा है। मास्टर प्लान में अनुषंगी नगरों के विकास के प्रस्तावों के फलस्वरूप इन नगरों के स्वरूप में विकासोन्मुख परिवर्तन आ रहा है। इससे पूर्व प्रस्तावित अनुषंगी नगर ग्रामीण परिवेष के रूप में परिलक्षित थे तथा इनमें अधिकतर केवल आसपास के ग्रामीण लोगों को सुविधा प्रदान करने के लिए सुविधा दुकानें, प्राथमिक स्कूल, पटवार घर एवं ग्रामीण कुटीर उद्योग ही स्थापित थे। जनसंख्या भी सामान्य गति से बढ़ रही थी। अधिकांष कार्यषील लोग मुख्य सड़क में नित्य श्रमिक के रूप में कार्य करने जाया करते थे, परन्तु इनको अनुषंगी नगर के रूप में पहचान मिलने के बाद इनमें विकास की नवीन लहर उत्पन्न हो गयी है। यहाँ पर अनेक औद्योगिक इकाईयाँ, राजकीय एवं वैयक्तिक संस्थान, यातायात एवं पेयजल, विद्युत आदि जन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। इन प्रयासों के फलस्वरूप इनकी जनसंख्या, व्यावसायिक संरचना एवं जीवन षैली में बदलाव आ रहा है। अब इनके ग्रामीण स्वरूप में परिवर्तन हो रहा है तथा नागरिक स्वरूप में विकास हो रहा है।
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