भरतय जञन परणल क सनदरभ म वदयरथय म नततव गण क वकस
Abstract
भारतीय ज्ञान प्रणाली एक अति प्राचीन और व्यापक ज्ञान प्रणाली है, जिसको पूर्णतः समझना सरल नहीं है । इसका स्रोत भारतीय वाङ्मय में निहित है, जो संस्कृत वाङ्मय पर आधारित है । भारतीय ज्ञान परम्परा के अधिकाधिक तत्त्व संस्कृत वाङ्मय में लिपिबद्ध होने के कारण इसका अध्ययन अनिवार्य हो जाता है । संस्कृत वाङ्मय में वेद, पुराण, इतिहास, काव्य, नाटक, कृषि, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, सङ्गीत एवं नृत्य वाद्य आदि कलाएँ एवं विभिन्न प्रकार के विशिष्ट ज्ञान-विज्ञान समाहित हैं । अतः भारतीय ज्ञान प्रणाली का समग्र अध्ययन और अवबोध संस्कृत वाङ्मय के गहन अध्ययन से संभव है ।संस्कृत वाङ्मय में छात्रों में नेतृत्व गुणों के विकास के लिए विभिन्न उपागम बताए गए हैं । आदर्श नेता के अनेक गुणों का वर्णन किया गया है, जिनमें श्रीराम को आदिकाव्य में एक आदर्श नायक के रूप में वर्णित किया गया है । व्यक्ति को राम जैसा नेता बनना चाहिए, न कि रावण जैसा, यह प्रायः कहा जाता है ।
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