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गरमण कषतर म 10व ककष क छतर व छतरओ क शकषक रच क तलनतमक अधययन

International Journal of Applied Research · 2024 · Vol. 10(1) · pp. 22–25

Abstract

ग्रामीण क्षेत्रों में पहले लड़के, लड़कियों में शिक्षा का अभाव पाया जाता था। आज जैसे तसैे वे दसवीं या कुछ गांवों में सैकण्डरी स्कूल होने से वे बाहरवीं की शिक्षा तो प्राप्त करने लगे हैं लेकिन फिर भी कुछ गांवों में सिर्फ माध्यमिक विद्यालय होने से उच्च शिक्षा का अभाव पाया जाता है। इसी कारण उनकी शैक्षिक रूचियों का प्रश्न इतना अधिक नहीं होता। ग्रामीण वर्ग के अधिकतर लागे अनपढ़ होने के कारण लड़की को आश्रित तथा बोझ समझते हैं। वे लड़की को पराया धन समझते है। इसीलिए लड़कियों को गांव से बाहर भेजकर पढ़ाने से डरते है। यदि उन्हें थोड़ा बहुत पढ़ाते भी है तो सिर्फ इस मकसद के लिए कि वह पत्र व्यवहार ही कर सके या फिर लड़कियों को सिलाई कढा़ई के व्यवसाय से सम्बन्धित शिक्षा तक ही सीमित कर दिया जाता है। इसके विपरीत लड़कों की शिक्षा को फिर भी आर्थिक कठिनाईयों के रहते हुए भी आगे बढ़ा दिया जाता है। उनकी पढ़ाई को आगे बढा़ ने के लिए उन्हें शहरों में भी भेज दिया जाता है। इसलिए उनका जीवन उच्चता की ओर बढ़ जाता है।

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