गरमण कषतर म 10व ककष क छतर व छतरओ क शकषक रच क तलनतमक अधययन
Abstract
गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में पहले लड़के, लड़कियों में शिकà¥à¤·à¤¾ का अà¤à¤¾à¤µ पाया जाता था। आज जैसे तसैे वे दसवीं या कà¥à¤› गांवों में सैकणà¥à¤¡à¤°à¥€ सà¥à¤•ूल होने से वे बाहरवीं की शिकà¥à¤·à¤¾ तो पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने लगे हैं लेकिन फिर à¤à¥€ कà¥à¤› गांवों में सिरà¥à¤« माधà¥à¤¯à¤®à¤¿à¤• विदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ होने से उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ का अà¤à¤¾à¤µ पाया जाता है। इसी कारण उनकी शैकà¥à¤·à¤¿à¤• रूचियों का पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨ इतना अधिक नहीं होता। गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ वरà¥à¤— के अधिकतर लागे अनपॠहोने के कारण लड़की को आशà¥à¤°à¤¿à¤¤ तथा बोठसमà¤à¤¤à¥‡ हैं। वे लड़की को पराया धन समà¤à¤¤à¥‡ है। इसीलिठलड़कियों को गांव से बाहर à¤à¥‡à¤œà¤•र पà¥à¤¾à¤¨à¥‡ से डरते है। यदि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ थोड़ा बहà¥à¤¤ पà¥à¤¾à¤¤à¥‡ à¤à¥€ है तो सिरà¥à¤« इस मकसद के लिठकि वह पतà¥à¤° वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° ही कर सके या फिर लड़कियों को सिलाई कढा़ई के वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ शिकà¥à¤·à¤¾ तक ही सीमित कर दिया जाता है। इसके विपरीत लड़कों की शिकà¥à¤·à¤¾ को फिर à¤à¥€ आरà¥à¤¥à¤¿à¤• कठिनाईयों के रहते हà¥à¤ à¤à¥€ आगे बà¥à¤¾ दिया जाता है। उनकी पà¥à¤¾à¤ˆ को आगे बढा़ ने के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शहरों में à¤à¥€ à¤à¥‡à¤œ दिया जाता है। इसलिठउनका जीवन उचà¥à¤šà¤¤à¤¾ की ओर बॠजाता है।
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