Scinovex
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सरय ततव वमरश

International Journal of Sanskrit Research · 2023 · Vol. 9(6) · pp. 234–239

Abstract

सूर्य सृष्टि की आत्मा है कालपुरूष की आत्मा के रूप में भी सूर्य को स्वीकार किया गया है। ग्रहों के मंत्रिमण्डल में सूर्य को राजा कहा गया है। सांसारिक जीवन में भी राजयोग का कारक सूर्य को ही माना जाता है। आत्मा कर्माध्यक्ष है, कर्ता नहीं। जीव कर्ता भोक्ता है। जीव स्वकर्मवश सुख दुःख पाता है। ”मैं करता हूँ”-ऐसा कहना उचित नहीं। कर्म ही कर्म को करा रहा है।

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सरय ततव वमरश · Scinovex