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आध सद स अधक फल ‘मतर सवद’ क वभनन पकष क पड़तल

International Journal of Humanities and Arts · 2022 · Vol. 4(1) · pp. 45–48

Abstract

मित्रता उच्चतर जीवन मूल्यों में से एक है। सच्चा मित्र हमारे सुख-दुःख का सच्चा सहचर होता है। मित्रता, स्नेह, सच्चाई, समर्पण की भावभूमि पर होती है। मित्रता में छोटे-बड़े, अमीर-ग़रीब, अपना-पराया जैसे भावों के लिए जगह नहीं होती। मित्रता का मोती समानता की सीपी में रहता है। ‘मित्र संवाद’ कवि केदारनाथ अग्रवाल और आलोचक रामविलास शर्मा के चैसठ वर्षों का पत्र-व्यवहार है। पत्र जो परस्पर एक-दूसरे को लिखे गये हैं। आज के इस अवसरवादी युग और बाज़ारवादी संस्कृति में जहाँ मित्रता लेन-देन व लाभ-हानि की संभावना से बनती टूटती है, ऐसे समय में आधी शताब्दी से अधिक समय तक चलने वाली केदारनाथ अग्रवाल और रामविलास शर्मा की यह मित्रता दुर्लभ जान पड़ती है। इन पत्रों में दोनों लेखकों के अंतरंग जीवन का इतिहास भी अंकित है और साथ ही इनमें पारिवारिक, सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक परिवेश की भी अभिव्यक्ति है। दो मित्रों के एक-दूसरे की हाँ में हाँ मिलाने वालों के, ये पत्र नहीं हैं। इनमें दुनिया-जहान की बातें गहरे सरोकारों के साथ उपस्थित हैं। दोनों पत्र लेखक मित्र अपने समय, समाज से सार्थक संवाद करते हैं। प्रस्तुत शोध आलेख में ‘मित्र संवाद’ के पत्रों की विशिष्टताओं पर विचार किया गया है।

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