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पतर क दरपण म नरल क वयकततव

International Journal of Sociology and Humanities · 2019 · Vol. 1(1) · pp. 28–31

Abstract

लेखक अपने पत्रों में सबसे ज़्यादा खुलते हैं। पत्र लेखकीय जीवन के अनेक अनछुए पक्षांे को उजागर करते हैं। पत्रों में लेखक के व्यक्तित्व की अनेक विशेषताएँ उद्घाटित होती हैं। लेखक का स्वभाव, उसकी तत्कालीन मनःस्थिति तथा उसके व्यक्तिगत जीवन के संबंध में दुर्लभ सूत्र भी पत्रों में मिल जाते हैं। मनुष्य केवल वह नहीं होता जिसकी झलक उसके अनुशासित जीवन और औपचारिक संबंधों से मिलती है। उसके संपूर्ण व्यक्तित्व का परिचय उसके नित्य जीवन और छोटे-छोटे ब्यौरों से मिलता है। यह संदर्भ रचनाकार के युग को भी प्रस्तुत करता है। पत्रों के माध्यम से हम व्यक्तित्व से होकर तत्कालीन युग तक पहुँचते हैं। साहित्यकारों के पत्र उनके जीवन, साहित्य और अपने समय के प्रामाणिक दस्तावेज़्ा होते हैं।

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पतर क दरपण म नरल क वयकततव · Scinovex