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भकतकल क कव रमनद क सगतक यगदन

International Journal of Advanced Academic Studies · 2023 · Vol. 5(8) · pp. 28–30
Vaishali Sharma MishraSudha Dixit

Abstract

आचार्यरामचन्द्रशुक्लनेहिन्दीसाहित्यकेइतिहासकोचारभागोंमेंविभाजितकियाहै: द्रव्यगाथाकाल, भक्तिकाल, रीतिकालऔरआधुनिककाल।संवत 1050 से 1365 तकवीरगाथाकालकेअंतर्गतआताहै, 1365 से 1700 तकभक्तिकालकेअंतर्गत, 1700 से 1900 तकरीतिकालकेअंतर्गतऔर 1900 सेआजतककासमयभक्तिकाव्यकेसमकालीनकालकेअंतर्गतआताहै।भक्तिकालकोहिंदीसाहित्यकाचरमकालमानाजाताहै।येचारमहानकवि- सूर, तुलसी, कबीरऔरजायसी- भक्तिकालमेंरचेगये।हिंदीसाहित्यकेसूर्यऔरचंद्रमाकाजन्मइसीयुगमेंहुआ।हालाँकिइसपूरेसमयमेंतीनधाराएँचलरहीथीं - प्रेम, ज्ञानऔरशुद्धभक्तिकामार्ग - केवलभक्तिकाआंतरिकस्रोतहीप्रवाहितहोरहाथा, यहीकारणहैकिइससमयअवधिकोभक्तिकेकालकेरूपमेंजानाजाताहै।भक्तिभीप्रेमकारूपधारणकरलेतीहै।भक्तिकाव्यकीदोधाराएँथींएकसगुणधाराऔरदूसरीधारा।निर्गुणधाराकेसंस्थापकोंद्वारानिराकारईश्वरकीपूजाकोप्राथमिकतादीगई।ज्ञानऔरप्रेमकेमार्गनिर्गुणधारासेनिर्मितहुए।मुहम्मदजायसीप्रेममार्गीशाखाकेगुरुथे, जबकिकबीरज्ञानमार्गीशाखाकेआदिकविथे।

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