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वशवकरण क यग म गध क आरथक चतन क परसगकत
International Journal of Sociology and Humanities · 2022 · Vol. 4(1) · pp. 29–31
Abstract
गाँधीजी की आर्थिक आयामों का संबंध व्यक्ति और समाज के उत्थान के साथ जुड़ा हुआ है। आपका मानना है कि जब तक हमारा समाज आर्थिक रूप से प्रभावशाली नहीं होगा तो उन्हें अनेक प्रकार की आर्थिक समस्याएँ व्याप्त होंगी। गाँधी जी कहते हैं कि आर्थिक समानता की जड़ में धनिक का ट्रस्टीपन निहित है। समाज में आर्थिक समानता लाने के लिए पूंजीपतियों एवं जमीदारों के पास जो अनावश्यक धन व भूमि है, उसको प्राप्त कर उन्हें सामाजिक संरक्षण के रूप में रखा जाए, जिसका उपयोग निर्धन लोगों के लिए हो। इस प्रकार गाँधी की आर्थिक चिंतन द्रवित नैतिकता की बुनियाद पर टिकी हुई है जिसमें मानव के शोषण की गुंजाइश नहीं है।
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