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दरसगर कषतर (जल अनपपर, मधय परदश) क परतततवक समनवषण एव उतखनन क वशलषणतमक अधययन

International Journal of History · 2022 · Vol. 4(2) · pp. 166–173

Abstract

मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित दारसागर ग्राम के निकटवर्ती क्षेत्र में किए गए पुरातात्विक सर्वेक्षण और उत्खनन से अत्यंत महत्वपूर्ण पुरावशेष प्राप्त हुए हैं । अनूपपुर जिला नर्मदा, सोन और जोहिला नदियों के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। पवित्र-स्थल और तपस्थली के रूप में अमरकंटक की विशिष्ट धार्मिक और अध्यात्मिक महिमा है। अनूपपुर जिले में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय द्वारा किए गए पुरातात्विक अभियानों से क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्त्व के विविध पक्ष उद्घाटित हुए हैं। शिवलहरा की प्राचीन गुफाओं और गम्भीरवा टोला के पुरातन टीलों से प्राप्त सूचनाएँ इस क्षेत्र के इतिहास के प्रच्छन्न तथ्यों को प्रकाशित करती हैं । शिवलहरा की गुफाओं के ब्राह्मी लेख तथा गुफाओं का स्वरूप इस क्षेत्र को प्रथम शताब्दी ई. का एक महत्त्वपूर्ण स्थल सिद्ध करते हैं। इन्ही गुफाओं से दक्षिण दिशा मे लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर केवई नदी के तट पर ही सर्वेक्षण के दौरान पुरावशषों से परिपूर्ण सात बडे टीले प्राप्त हुए थे। जहाँ से कुषाणकालीन ईंटे, मण्डलकूप में प्रयुक्त होने वाली मृण्मय नाली के अवशेष तथा मृद्भाण्ड खण्ड बडी संख्या में प्राप्त हुए। सतही सर्वेक्षण में इन टीलों से प्राप्त सिलबट्टे, कोडियों के अवशेष एवं शंक्वाकार मृण्मय वास्तु खण्डों की प्राप्ति ने इस स्थल के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न की और बाद में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण की अनुमति से दारसागर के गम्भीरवा टोला में मध्य प्रदेश राज्य पुरातत्त्व विभाग और डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर शोध संस्थान, भोपाल के साथ मिलकर उत्खनन किया गया गया। उत्खनन के उपरांतआरंभिक ऐतिहासिक कालीन व गुप्तकालीन स्तरों से ताम्रवस्तुएं, हाथी दांत, शंख, पत्थर, पकी मिट्टी और अस्थि पर निर्मित दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुए, मनोरंजन की सामग्री, शंतरज के मोहरे, चैपड़ के पांसें, खिलौना गाड़ियों के पहिये, अंजन- शलाकाएँं, पत्थर के उपकरण, पकी मिट्टी की छोटी गोलियाँ, आभूषण और अस्त्र-शस्त्र प्राप्त हुए हैं जो तत्कालीन मानव-जीवन के विविध पक्षों पर व्यापक प्रकाश डालते हैं। इस शोध पत्र में दारसागर क्षेत्र पुरातात्त्विक समन्वेषण एवं उत्खनन का विश्लेषणात्मक अध्ययन करके प्राप्त पुरावशेषों का विस्तृत कालानुक्रमिक विवरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

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