भरतय गरमण वकस और समजक परवरतन
Abstract
ग्रामीण विकास गाँव के सर्वांगीण विकास से सम्बन्धित है जिसमें आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक पक्ष समाहित हैं। ग्रामीण विकास गाँव की अधिरचना में आमूलचूल परिवर्तन से सम्बन्धित प्रक्रिया है जिसके द्वारा ग्रामीण समाज के व्यक्तियों की जीवनशैली को सरल बनाया जाता है। ग्रामीणों को नगरों की तरफ पलायन से रोकने के लिये रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के सरकारी प्रयास किये जाते हैं। कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था वाले देशों में गाँव के विकास के बिना अर्थव्यवस्था को गति देना सम्भव नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित है, अतः बिना ग्रामीण क्षेत्रों को विकसित किये भारत का विकास सम्भव नहीं है। गाँधीजी का कथन कि भारत के विकास का रास्ता ग्रामीण क्षेत्रों से ही होकर जाता है, सम्पूर्ण विकास को स्पष्ट कर देता है।
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