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ससकत रपक क तततव ममस
International Journal of Sanskrit Research · 2022 · Vol. 8(5) · pp. 74–78
Vivek Kumar✉(University of Allahabad)Satya Prakash Srivastava(University of Allahabad)
Abstract
रूपकों की ज्ञानमीमांसा उसके तत्त्वमीमांसा पर आधारित है। ये तत्त्व है- वस्तु, नेता तथा रस। यही तीन तत्त्व रूपकों के बीज है जो विस्तारित होकर वृक्ष का रूप लेते है। प्रामाणिक और प्राथमिक स्त्रोतों के आधार पर रूपकों की तत्त्वमीमांसा के विवेचन से स्पष्ट होता है कि वस्तु, नेता एवं रस ही रूपकों के मूल तत्त्व है। जिससे दस रूपकों के भेद तथा लक्षण, कथावस्तुओं के विभिन्न प्रकार, नायक नायिका के प्रकार, उनके सहायक, तथा रसों के भेदोपभेद का विवेचन-विश्लेषण होता है। कथावस्तु, नेता एवं रस का सैद्धान्तिक, लाक्षणिक एवं प्रासंगिक विवेचन प्रस्तुत शोधपत्र में किया गया है।
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