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पणनय अषटधयय म आतमनपद-वयवसथ

International Journal of Sanskrit Research · 2022 · Vol. 8(4) · pp. 09–14

Abstract

पदऔरवाक्यकेअर्थकापूर्णतःशुद्धबोधहोसके, तदर्थहीव्याकरणशास्त्रमेंपरस्मैपदऔरआत्मनेपदकीव्यवस्थाकीगईहै, इससेपृथक्उभयपदकापरिगणनभीकियाजाताहै।जिनधातुओंसेपरस्मैपदऔरआत्मनेपदकाविधानहोताहै, वेधातुएँउभयपदीकहलातीहैं।परस्मैपदमेंधातुओंकेरूपसर्वसामान्यजनभीअनायासरूपमेंप्रयोगकरलेतेहैंकिन्तुवेआत्मनेपदकोक्लिष्टसमझआत्मनेपदकोपरिहेयबतातेहैं, संस्कृतभाषाकोदुरूहबताकरइससेदूरभागखड़ेहोतेहैं।अतएवआत्मनेपदक्याहै, कहाँ, किन-२धातुओंसेऔरकिन-२अवस्थाओंमेंहोताहै, इत्यादिकाध्यानरखतेहुएपाणिनीयपद्धतिकोसहजऔरसरलजानहीप्रस्तुतशोधलेखमेंअष्टाध्यायीमेंप्रसृतआत्मनेपदकीनियमन-व्यवस्थाकोप्रकाशितकरविवृतकरनेकायत्नकियागयाहै।

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