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आधनक भरतय रजनतक म जतवद और छआछत क खलफ सवततरत सगरम
International Journal of Advanced Academic Studies · 2020 · Vol. 2(4) · pp. 125–131
Abstract
परम्परावादी सामाजिक संरचना में आधुनिक राजनीतिक संस्थाओं की स्थापना भारतीय राजनीतिक का एक अद्भूत पक्ष है। उदारवादी जनतंत्रीय संस्थाओं और जाति व्यवस्था का पारस्परिक सम्बन्ध एक विचित्र समस्या प्रस्तुत करता है। जाति व्यवस्था भारतीय समाज का अटूट अंग रही है और इसने जीवन के सभी पक्षों को प्रभावित किया है। स्वतन्त्रता से पूर्व भी जाति व्यवस्था का राजनीतिक जीवन पर काफी प्रभाव था। स्वतन्त्रता के बाद जाति व्यवस्था का अन्त नहीं हुआ, लेकिन स्वरूप अवश्य परिवर्तित हो गया। आज भी जातिप्रथा उतना तो नहीं लेकिन बरकरार है। जातिप्रथा मानव एवं समाज को प्रभावित करता है। इस सोच को बदलना समाज को नई दिशा प्रदान करना है।
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