भरतय इतहस क पनन म रजधब जत: एक अधययन
Abstract
राजधोबी का शाब्दिक अर्थ राजा का कपड़ा धोने वाले समूहों से है, अर्थात् राजा + धोबी = राजधोबी। इन्हें राजधोब भी कहा जाता है, अर्थात् राजा + धोब = राजधोब। यह समुदाय मूलरूप से धोबी जाति ही है, जिसका मुख्य कार्य, राज परिवार के कपड़े धोने, रंगने, इस्त्री करने से संबंधित रहा है। कालान्तर में, अंग्रेजों के आने के बाद एवं मिथिला के राजतंत्र व्यवस्था संकट में होने के फलस्वरूप, इनके व्यवसायों में कुछ परिवर्तन हुआ, और ये लोग चटाई बुनने, मजदूरी करने, पशुपालन (भैंस, बकरी), और कुछ लोग कोशी नदी के तट पर दरभंगा महाराज के निर्जन भूमि पर खेती एवं खेतिहर मजदूर का काम करने लगे। ये लोग शूद्र वर्ण (Shudra Varnas) व निम्न जाति समूह के हैं, जो धोबी की उपजाति है, तथा कश्यप गोत्र के मानने वाले हैं।
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