article
लक कल म जयमतय रप
International journal of applied research · 2021 · Vol. 7(11) · pp. 162–164
Abstract
लोक कला अलग-अलग सथान पर अलग-अलग नाम स जानी जाती ह। जो सथान विशष की सभयता ससकति की परिचायक ह। जस राजसथान म माडना, महाराषट की रगोली, उततरपरदश का चक परना, असम बगाल म अलपना। इनको बनान म जयामितीय आकारो का विशष महततव ह। य जयामितीय आकार परतीक सवरप विशिषट अरथ लिए होत ह। तरिभज पड, पौध पहाड क परतीक, तो वत सरय चाद का परतीक, उलट सीध तरिभज मिलकर मानवाकति, पश आकति का परतिनिधितव करत ह। विषय और परसग क अनसार इनक अरथ बदलत रहत ह।
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