वरतमन समय म बदध धरम क परसगकत
Abstract
बौदध धरम भारतीय साहितय एव ससकति का वह मलयवान बौदधिक, नतिक एव सामाजिक तथा मानवतावादी जीवन पकष ह जो समपरण मानवता को अतीत की भाति आज भी अरनतदषटि परदान करता ह। बौदध धरम अतयत निरमल, निषकलक, निशछल, सारवजनीत, सारवभौमिक, सारवकालिक, सनातन, वजञानिक एव आशफलदायी ह, इसम परजञा, शील, समाधि, सदाचार व धयानादि क माधयम स शरीर व चिŸा क पारसपरिक परभाव कषतर का यथाभत दरशन करत हए मन क अदर की गहराईयो म निरीकषण करत हए परपच मय अनितयबोधिनी परजञा को जागत किया जाता ह, ताकि मन एव शरीर को विकार मकत किया जा सक। अतः बौदध धरम वयकति की आधयातमिक उननति क साथ-साथ उस शदध चिŸा, विकार रहित शरीर व सवासथयपरद वातावरण यकत जीवन पदधति परदान करता ह। अपन अतीत क गौरव को याद रखकर चलना ही भविषय का निरमाण ह। दसर को हानि न पहचाना ही बदध का दरशन ह। ‘अतत दीपो भव’ की कलपना को सवीकार करना आज की महती आवशयकता ह। आज क इस वजञानिक एव भमडलीकरण क रप म जब परी दनिया आतकवाद, कषतरवाद, जातिवाद, एव वरचशव क सघरषरत ह तो भगवान बदध की करणा सहिषणता एव विशव शाति का सदश सपरण विशव का मारग दरशन करगा।
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