article
आधनक भरत म आदवस वकस म वशवकरण क भमक
International journal of applied research · 2020 · Vol. 6(10) · pp. 97–100
Abstract
वशवीकरण क इस वरतमान दौर म मनषय जाति न विकास क नित नय परतिमान गढ ह। तकनीकी विकास की इस कराति न विभिनन दशो म वशविक परिदशय परदान करत हए उनह एक गाव म परिवरतित कर दिया ह। विशव की अलग-अलग सभयता, ससकति एव भाषागत विविधताओ को दर किनार करत हए वशविक गाव क निरमाण की करतल धवनि जगत म गजायमान हो रही ह। परनत दसरी ओर ‘मखयधारा‘ स पथक एक ऐसा सामाजिक वरग भी ह जो विकास क धधल परकाश स कोसो दर ह इस वचित वरग को विकास क तमाम दावो क बाद भी आदिवासी समदाय भखमरी, गरीबी, भौतिक ससाधनो क अभाव क बीच जीवन-यापन करन को अभिशपत ह। वशवीकरण की इस परकरिया म आदिवासी समाज म सकारातमक व नकारातमक दोनो तथयो स परिवरतन दखा जा सकता ह।
Citations
0
FWCI
0.00
field-weighted impact
References
0
Percentile
70%
vs. same field & year
Citation Network
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
