सनध सभयत कलन शलप, उदयग, वणजय, वयपर एव नगरय जवन
Abstract
सिनध सभयता शिलप तथा उदयोग धनध म कताई-बनाई, आभषण, बरतन और औजार आदि कई वसतओ का निरमाण किया करत थ। यातायात क लिए बलगाड़ी और भसागाड़ी का परयोग कर दश-विदश स वयापार किया करत थ। सिध सभयता या हड़पपा सभयता क लोग कषि और पशपालन क साथ-साथ शिलप कला तथा उदयोग, वाणिजय, वयापार म भी बढ़-चढ़कर रचि लिया करत थ। सिनध घाटी सभयता क हड़पपा, मोहनजोदड़ो, लोथल आदि नगरो की समदधि का परमख सरोत वयापार और वाणिजय था। यदि वयापारिक सगठन की बात की जाए तो निशचय ही इतनी दर क दशो स बड़ पमान पर इतर कषतरो स वयापार हत अचछा वयापारिक सगठन रहा होगा. नगरो म कचचा माल आस-पड़ोस तथा सदर सथानो स उपलबध किया जाता था। वासतव म सिनध घाटी सभयता अपनी विशिषट एव उननत नगर योजना क लिए विशव परसिदध ह कयोकि इतनी उचचकोटि का “वसति विनयास” समकालीन मसोपोटामिया आदि जस अनय किसी सभयता म नही मिलता. सिनध अथवा हड़पपा सभयता क नगर का अभिविनयास शतरज पट की तरह होता था, जिसम मोहनजोदड़ो की उततर-दकषिणी हवाओ का लाभ उठात हए सड़क करीब-करीब उततर स दकषिण तथा परण स पशचिम को ओर जाती थी। इस परकार चार सड़को स घिर आयतो म “आवासीय भवन” तथा अनय परकार क निरमाण किय गय थ।
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