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बरह पथ: एक एतहसक ववचन
International Journal of History · 2020 · Vol. 2(2) · pp. 34–37
Abstract
‘बारह पथी’ नाथ पथ की 12 शाखाए ह। नाथ पथ पराचीन सत समपरदाय ह। नाथ पथ का उदभव आदि दव शिव स माना जाता ह। नाथ नथ क अनयायी शिव की अराधना करत ह। इनक साधना पदधति हठयोग पर आधारित ह। आतम साकषातकार तथा समाज कलयाण नाथ पथियो का मखय धयय ह। गोरखनाथ जी न कर सभी शव समपरदायो को सगठित कर उस समय उनहोन नाथ समपरदाय को बारह शाखाओ म बाट दिया। परतयक शाखा का अपना महातमा तथा अपना सथान होता ह। वह सथान उनका तीरथ तथा महातमा को आदि पररवतक मानकर उसकी पजा करत ह। बारहपथी शाखाओ म 6 शिव तथा 6 गोरखनाथ स समबनधित नाथ पथ स समबनधित रखत ह। य बारह पथी शाखाए समपरण भारत वरष म फली हई ह।
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