परचन भरत क समजक-ससकतक परवश म दस परथ एव असपशयत क समसय
Abstract
दास वरग का चितरण भारत क पराचीनतम गरथ ऋगवद पराण, बराहमण गरथ, बौदध गरनथ एव जन गरथो म भी उपलबध ह, यह सतय ह। आधनिक काल म सतरी एव दास वरग को जिस रप म चितरित किया गया ह, उस रप म वहा चितरित नही ह। पराचीन काल म आरय की सथिति अचछी थी और अनारय की सथिति दयनीय थी आरयो की पजा होती थी, वही समपरण ऋगवद म अनारयो की भरतसणा की गई ह। इनह दास, दसय या असर की सजञा दी गई। दासो और दसयओ क अपन नगर थ जिनक विनाश की परारथना आरयो न बार-बार इनदर स ही ह। आरयो-अनारयो का सरघष परयापत समय तक चलता रहा, अनत म आरयो न दसय तथा दास जातिवालो अनारयो को बरी तरह पराजित कर दिया। यदध म काम आन क पशचात बहत अधिक सखया म दसय या दास जाति हो गई। इन शष लोगो को विवश होकर या तो आरयो स कही बहत दर जगल कनदराओ की शरण लनी पड़ी या तो उनही की अधीनता सवीकार करनी पड़ी। फलतः इस दसय या दास जाति क इतन अधिक लोग गलाम बनाय गय कि दास शबद का अरथ ही गलाम हो गया।
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