अमल बटरह क कवय म ससरक जवन क ववध चतर क अधययन
Abstract
परसतत शोध पतर अमोल बटरोही क कावय म सासारिक जीवन क विविध चितर का अधययन पर आधारित ह। समाज, राजनीति, अरथ, ससकति एव चरितर यही आज क जीवन क पचततव ह। इनही स वरतमान जीवन पदधति निरमित एव गतिमान ह। और जब इनही म धन लग जाय तो जीवन ही कया, समपरण राषटर जरजर हो जायगा। वह जीता तो रहगा किनत भीतर स खोखला होकर। वरतमान यग म सामाजिक विदरपता क अनक यथारथ दशय परसतत करन वाल रचनाकारो म रामदास पयासी, सफ, शभ, गलाम गौस, डा. भगवती परसाद शकल, रामलखन शरमा ‘निरमल’, शिवशकर मिशर ‘सरस’ तथा आर.जी. विकल आदि परमख ह। बमल विवाह, बाल विवाह, दहज परथा, विधवा विवाह, छआछत, वरगभद, अशिकषा आदि परमख रप स सामाजिक विदरपता क अनतरगत आत ह। मानव जीवन सकीरणताओ एव विदरपताओ क कारण अदना हो गया ह, साथ ही उसका परिवश भी सकीरण हो गया ह। ‘अमोल बटरोही’ 1967 स परारमभ कर 1995 तक म निरनतर अपन कावय एव शिलप म विकास करत चल गय ह। ठठ बघली शबदो एव विशदध गरामीण परिवश म नतन बिमब परतीको की सथापना करत हए उनहोन बघली-माटी की सोधी महक विशव म बिखरन का अभिनव परयास किया ह। कथय एव शिलप म वविधय की दषटि स उनका वाड.मय विराट ह। बोधगमय होन क कारण उनकी कविताए बघलखणड-अचल म अतयनत लोकपरिय ह। उनक कावय की थाती राषटर दवारा सरकषणीय एव सवहनीय ह।
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