महल सशकतकरण हत बलक शकष क आवशयकत एक ऐतहसक अधययन
Abstract
किसी भी समस्या के निराकरण हेतु हमें उसकी जड़ को पहचानना पड़ता है। आज यदि नवजात बच्ची से लेकर प्रौढ़ महिला तक को दोयम दर्जे का शिकार होना पड़ रहा है तो उसका कारण एक तरफ लोगों के संकीर्ण मानसिकता है तो वहीें दूसरी तरफ उनकी दयनीय आर्थिक स्थिति भी इसकी बराबर की जिम्मेदार है। अतः हमारे प्रयास दोनों ही दिशाओं में एक साथ होने चाहिए। बालिकाओं के विकास व शिक्षा में आने वाली आर्थिक बाधा को दूर करने वाली वैकल्पिक योजनाओं के साथ-साथ जनमानस के अंतर्मन से बालिकाओं व महिलाओं के लिए बनाई गई संकीर्ण अवधारणाओं की समाप्ति भी आवश्यक हैं इसलिए हमें ’बेटी पढाओं एवं ’सुकन्या समृद्धि योजना‘ के साथ-साथ पूर्व की ’सशर्त नकद हसतांतरण‘ योजनाओं का सरलीकरण कर, इनमें व्याप्त विसंगतियों को दूर कर कार्यान्वित करना होगा। सभी सतरों पर बेहतर तालमेल व समग्र प्रयास के द्वारा ही देश में बेटियों की दशा सुधर पाएगी।
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