औपनवशक भरत क परस भरतय सवततरत सगरम क ‘सफट-वलव’
Abstract
औपनिवशिक भारत क भारतीय परस व समाचार-पतर क अधययन स सपषट हो जाता ह कि इस यग का भारत बरिटन क साथ समबनध-विचछद की बात नही सोचता था|यह समझा जाता था कि भारत पर बरिटिश सतता का रहना उसक हित म ह कयोकि इसस भारत की एकता को बल मिलता ह और उसक भौतिक और सासकतिक हितो का साधन होता ह| इसी क साथ-साथ भारत सरकार क परशासन स परस असतषट थ| जिसक कारण खरचील यदध, वयय म वदधि, अधिक टकस, शिकषा, सवासथय आदि सामाजिक और बौदधिक कलयाण क कारयो की उपकषा होती थी| उचच सवाओ स भारतियो कोअलग रखन और बहत खरचील बरिटिश अधिकारिओ की नियकति, भारतियो को भाग न दना, जिसका मतलब था उनकी बौदधिक सामरथय और ईमानदारी म अविशवास इन सबस जनता म गहरी और लगातार नाराजगी पदा होन लगी थी|जिसस परस व पतरिका भारतीय सवततरता सगराम क सफटी-वालव क रप म कारय करन लग थ|
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