दकषण-दकषण सहयग क अवधरण एव समकलन दर म भमक चनतय एव समधर
Abstract
दवितीय महायदध की समापति क पशचात जिस वयापार व मदरा वयवसथा का निरमाण किया गया वह एक उदारवादी अनतरराषटरीय आरथिक वयवसथा का निरमाण करती ह, जिसम गट, अनतरराषटरीय मदरा कोष व विशव बक न अपनी ससथागत भमिका निभाई। इस वयवसथा म वशविक सतर पर विकासशील दश विकसित दशो दवारा उपकषित किए गय। यदयपि अनतरराषटरीय मदरा व वयापार वयवसथाओ क परबधन क लिए बरटनवडस वयवसथा की सथापना की गई। इस वयवसथा न बड़-बड़ औदयोगिक राषटरो क मधय विततीय व वाणिजयिक सबध बनान क लिए नियमो का निरमाण किया परत य वयवसथाए विकसित दशो का विकासशील दशो क शोषण का हथियार बनन लगी। विकसित एव विकासशील दशो म विषमता की रखा बढ़ती चली गयी। असमान वयापारिक विनिमय दवारा विकसित दशो न विकासशील दशो क बाजारो म अपनी जड़ जमा ली और आरथिक परकरियाआ को ससथागत सवरप दकर विकसित दश उनका शोषण करन लग। परिणामतः विकासशील दशो न नवीन अनतरराषटरीय अरथवयवसथा की माग की। दसरी ओर विकसित दश सथापित मजबत आरथिक वयवसथा व अनतरराषटरीय आरथिक सबधो म अपनी भमिका को कम करन क लिए तयार नही थ। विकसित दशो न नवीन अनतरराषटरीय अरथवयवसथा को सवय क लिए हानिकारक माना। नवीन अनतरराषटरीय अरथवयवसथा की आवशयकता क साथ ही उततर-दकषिण विवाद भी शर हो गया, जिसक परतयततर म दकषिण-दकषिण सवाद व सहयोग की भी आवशयकता हई।
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
