सतन जल म उचचतर मधयमक सतर क कशरवय बलकओ क सवगतमक बदध क उनक शकषणक उपलबध पर पड़न वल परभव क अधययन
Abstract
विदयारथी राषटर की समपतति और उसक भावी करणधार होत ह। उनक मानसिक, शारीरिक, बौदधिक, नतिक और आधयातमिक आदि सभी परकार क निरमाण एव विकास का उततरदायितव अधयापक पर होता ह। छातर बगीच क पौध क समान ह, अधयापक माली ह, जो उस पौध को सीचत ह, एव उनकी काट-छाट करत ह तथा अनय सब परकार स उनकी दखभाल करत ह। शिकषा क आधनिक मनोविजञान म सवगो का परमख सथान ह। सवग हमार सब कारयो को गति परदान करत ह और शिकषक को उन पर धयान दना अति आवशयक ह। सवग क अभाव म मानव-मसतिषक अपनी किसी भी शकति को समापत करन म असमरथ रहता ह। अतः शिकषक का परमख कतरतवय ह कि बालको म उचित सवगो का निरमाण और विकास कर। शोध कषतर क 75.87 परतिशत नयादश म चयनित अभिमतदाताओ न माना ह कि उचचतर माधयमिक सतर पर किशोरवय बालिकाओ क सवगातमक बदधि का उनक शकषणिक उपलबधि पर सीधा परभाव पड़ता ह।
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