सध जल म अनसचत जनजतय क सवरप: एक समजशसतरय अधययन
Abstract
परसतत शोध अनसचित जनजाति म सामाजिक गतिशीलता का एक सामाजिक अधययन ह। यदयपि समकालीन अनसचित जनजाति समदाय जिस सकरमणकालीन एव बदलाव की सथिति स होकर गजर रहा ह, इनम सामाजिक परिवरतन क चलत मल ससकति विलपत होन क कगार पर ह, पशचिमी ससकति एव सभयता का परभाव समपरण भारतीय समाज क साथ ही जनजातियो पर पड़ा ह, साथ ही सकरमणकालीन सथिति क लिए एक परमख पकष विकास की भी समसया ह। आजादी परापति क पशचात अनसचित जनजाति समाज क लोगो को विकास की मखय धारा स जोड़न एव इनक सरवागीण विकास हत अनक परयास किय गय ह। इस नियोजित परयास क अतिरिकत परिवरतन की नवीन शकतिया भी जनजाति समदाय को परभावित कर रही ह, सामाजिक परिवरतन और विकास की इस नवीन सादशय म अनसचित जनजाति समदाय की निरतरता, सथायितव एव असथिरता का परशन आदिवासी अधययन का कनदरीय विषय बन गया ह।
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