ससकतक वशवकरण
Abstract
वैश्वीकरण का शाब्दिक अर्थ स्थानीय या क्षेत्रीय वस्तुओं या घटनाओं के विश्व स्तर पर रूपांतरण की प्रक्रिया है। यहएकऐसी व्यवस्था है जिसके द्वारा पूरे विश्व के लोग मिलकरएक समाज बनाते हैं तथाएक साथ कार्य करते हैं। वैश्वीकरण राष्ट्रीय सीमाओं और संस्कृतियों में उत्पादों, प्रौद्योगिकी, सूचना और नौकरियों का प्रसार है। आर्थिक संदर्भ में देखा जाए तो यह मुक्त व्यापार के माध्यम से दुनिया भर में फैले राष्ट्रों कीएक दूसरे पर निर्भरता का वर्णन करता है। सकारात्मक दृष्टि से यह गरीब और कम विकसित देशों में नौकरी के अवसर प्रदान करनें, आधुनिकीकरण और माल और सेवाओं तक बेहतर पहुँच प्रदान करके जीवन स्तर में वृद्धि करने में सक्षम है। नकारात्मक पक्ष में, यह अधिक विकसित और उच्च मजदूरी वाले देशों में नौकरी के अवसरों को समाप्त कर सकता है क्योंकि माल का उत्पादन सीमाओं के बाहर जाता है। वैश्वीकरण का उदय 80वीं के दशक में हुआ था, परन्तु इसकी अवधारणा अति प्राचीन काल से ही मानव समाज में विद्यमान थी। 17वीं सदी के मध्य में इंग्लैण्ड का उपनिवेशवाद आरंभ हो गया था, वहीं फ्रांस ने भी इस दिशा में प्रगति की है। उपनिवेशवाद के परिणामस्वरूप ही वैश्वीकरण हम सभी के सामने आया। भूमंडलीकरण जिस बाजारवाद की विवेचना करता है उसका आधुनिक स्वरूप भारत में आज से 29 वर्ष पहले सन् 1991 के आर्थिक उदारीकरणएवं खुले बाज़ार की नीति के तहत सामने आया। इसका उद्देश्य न केवल अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना था बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत को आर्थिक रूप में खड़ा करना था। वैश्वीकरण से गरीबी उन्मूलन, रोजगार में वृद्धि, श्रम में गुणवत्ताएवं अनेक क्षेत्रों में बेहतरी की परिकल्पना की गई थी। सांस्कृतिक वैश्वीकरण दुनिया भर में विचारों, अर्थाें और मूल्यों के प्रसारण को इस तरह से संदर्भित करता है जिससे सामाजिक सम्बन्धों का विस्तार और गहन हो सके। इस प्रक्रिया को संस्कृतियों की आम खपत द्वारा चिन्हित किया गया है जो इंटरनेट, लोकप्रिय संस्कृति मीडिया और अंतरराष्ट्रीय यात्रा द्वारा फैल गई है। इसने कमोडिटीएक्सचेंज और उपनिवेशीकरण की प्रक्रियाओं को जोड़ा है। जिनका दुनिया भर में सांस्कृतिक अर्थ रखने का लम्बा इतिहास है। संस्कृतियों का प्रसार व्याक्तियों को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सीमाओं को पार करने वाले विस्तारित सामाजिक सम्बन्धों में भाग लेने में सक्षम बनाता है।ऐसे सामाजिक सम्बन्धों का निर्माण और विस्तार केवल भौतिक स्तर पर नहीं देखा जाता है। सांस्कृतिक वैश्वीकरण में सा-हजया मानदण्डों और ज्ञान का निर्माण शामिल है जिसके साथ लोग अपनी व्यक्तिगत और सामूहिक सांस्कृतिक पहचान को जोड़ते हैं। यह विभिन्न आबादी और संस्कृतियों के बीच परस्पर जुड़ाव को ब-सजय़ाता है।
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