भरत म कशल वकस म उभरत हय सभवनय
Abstract
दश क आरथिक, सामाजिक विकास क लिए कौशल, जञान, विजञान और तकनीकी योगयता वो पररक बल ह जो दश को आग ल जान म मदद करत ह। वरतमान वशविक माहौल म उभरती अरथवयवसथाओ की मखय चनौती स निपटन म व दश आग ह जिनहोन कौशल एव तकनीकी क उचच सतर को छ लिया ह। शरम बयरो की 2014 की रिपोरट क मताबिक भारत म औपचारिक रप स कशल कारयबल का वरतमान आकार कवल 2 परतिशत ह। पिछल कई दशको म शिकषा क गिरत सतर और पिछड़पन क कारण पारमपरिक शिकषा परापत करन वाल यवाओ क एक बड़ वरग को रोजगार समबनधी योगयता की चनौतियो का सामना करना पड़ रहा ह। ऐसा नही ह कि भारत म जञान, विजञान, नतिकता, आचार, विचार की कमी ह। इतिहास इस बात का गवाह ह कि पराचीन काल म भारत अपन कौशल, जञान, विजञान, जयोतिष, खगोल, गणित आदि क लिए विशव म जाना जाता था और आज भी भारतीय शिकषा वयवसथा शानदार मसतिषको को जनम द रही ह लकिन उसका परतिशत बहत कम ह। कालजो और विशवविदयालयो स निकलन वाली परतिभाओ म रोजगार योगय कौशल की कमी दखी गई ह और दसर हमारी शिकषा पदधति म कोई विशष परिवरतन नही हआ ह। हमारी वरतमान शिकषा पदधति का आधार परौदयोगिकी और तकनीकी नही ह जिसक कारण उचचशिकषा परापत करन क पशचात भी हमार यवाओ को नौकरी नही मिल पाती ह। इसक लिए हम अपनी शिकषा पदधति म सकारातमक परिवरतन लान होग। यवाओ को आवशयक वयवसायिक शिकषा परदान करनी होगी जिसस वह शिकषा का समचित परयोग कर सक। विदयालयो म तकनीकी एव कारय पर आधारित शिकषा का परयोग यवा उदयोगो और फकटरियो म कर सकग और आसानी स रोजगार पा सकग। इसक साथ ही साथ वयवहारिक रोजगारपरक शिकषा एव कौशल आधारित शिकषा पदधति अपनाकर हम बरोजगारी पर काब पा सकत ह।
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