परमचनद क कथ-सहतय म नर असमत क समकष
Abstract
परमचनद अपन उपनयास और कहानियो म नारियो क परति दयावान दिख रह ह और दिख भी कयो न परषो की भोगवादी परवतति क कारण नारिया हमशा स शोषण की शिकार होती रही ह। जो लोग जितन बड़ महान कह जात ह व नारियो का उतना बड़ा शोषक ह- जस राजा-महाराजा सब नारियो क रप-लावनय क आधार पर आशकत होकर शोषण करता ह जो नारी जितना अधिक रप, गण, शील, सवभाव स बड़ी मानी जाती थी, उसका उतना ही जयादा शोषण किया जाता था।ऐस म नारियो की असमिता खतर म पड़ना आम बात ह, समाज की सबस बड़ी खामिया दहज-रपी कोढ़ को भोगना ह। जिसका शिकार ‘सवासदन’ की नायिका समन को होना पड़ता ह। परमचनद न यह दिखान का परयास किया ह कि जिस चीज को समाज परतिषठा समझता ह, बचान क लिए सब कछ दाव पर लगाकर भी अततः दिखार हो ही जाता ह। इसी क परिणामसवरप समन अपन नापसद पति को छोड़कर वशयावति अपना लती ह। निरमला अपन पति क दवारा शक का शिकार होती ह और उनका घर उतथान क बजाय पततनोनमख हो जाता ह। ‘गोदान’ म भोला की बटी को गोबर क साथ भागकर विवाह करन का कारण दहज ही ह और दसरी बात समाज का जररत स जयादा परतिबध लगाना ह। परमचनद नारी को इस मानसिकता स मकत करना चाहत ह। जिसस नारी खली हवा म सास ल सक। परमचनद यह भी चाहत ह कि नारी को जीवन का जो भी कषतर हो जस- शिकषा, राजनीतिक, आरथिक, काननी, धारमिक सभी परकार की सवततरता मिलना चाहिए, तभी राषटर का उदधार समभव ह। नारी की असमिता की रकषा भी परमचनद क साहितय काएक बहत बड़ा उददशय ह।
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
