बड बक क आवशयकत कय?
Abstract
बड बक एक नवीन आरथिक अवधारणा ह जिसक अनतरगत आरथिक सकट क कारण घाट म चल रह बको दवारा अपनी दयताओ को एक नए बक म सथानातरित कर दिया जाता ह। अमरिका म 1988 म विशव का पहला बड बक सथापित किया था। 1991-92 म सवीडन न भी इसी तरह की ससथा की सहायता स आरथिक चनौतियो का सामना किया था। 2012 म सपन म इस तरह क बको का ही उपयोग किया था। दश म बढ़त एनपीए क कारण बड बक का विचार सशकत होता नजर आ रहा ह। दश म लगभग सितमबर 2020 म 7.5 परतिशत सकल एनपीए था जो भारतीय रिरजव बक न सितमबर 2021 म बढ़कर 13.5 परतिशत हो जान का अनमान बताया ह। आरथिक सरवकषण 2016-17 म भी एनपीए की समसया स निपटन क लिए इसी तरह की ससथा बनान का सझाव दिया था। बड बक की अवधारणा को आल इडिया बक एमपलाइज एसोसिएशन एआईबीईए न एक बरा विचार माना ह। इसका अरथ कवल कारपोरट घरानो क डिफालटरो को बक की किताबो स हटाना ह। ऋण भगतान एव बयाज चकान म दरी होन पर ऋण धारक क खिलाफ आवशयक काररवाही अमल म लायी जानी चाहिए। बक क अधिकारियो को इसम अधिक सतरकता स कारय करना चाहिए। बक अधिकारियो दवारा मितवययी मानदडो क आधार पर ऋण दन की आदत को सधारना चाहिए। जब बक सब तरह क परयासो स भी ऋणो को वसलन म असफल हो जाए तब ही इस बड बक को सथापित करन क विचार को वासतविकता क धरातल पर लाया जाना चाहिए।
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