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रजनतक भरषटचर करण और नवरण
International journal of applied research · 2016 · Vol. 2(4) · pp. 760–762
Abstract
हमारा दश अनक समसयाओ स गरसित ह, जस गरीबी, भखमरी, बरोजगारी, आतकवाद, अशिकषा, भरषटाचार आदि। इनम सबस बड़ी समसया ह भरषटाचार। भरषटाचार य तो दश की तमाम वयवसथा म वयापत ह, पर इसकी आधार शिला ह- राजनीतिक भरषटाचार। राजनीतिक और भरषटाचार का गहरा सबध सथापित हो गया ह। चनाव जीतन स लकर सतता म रहन तक की तिकड़मवाजी सरवविदित ह। जनता की सथिति क परति लापरवाह सतताधारी सरकारी खजान को लटन म अपनी परी शकति लगाए रहत ह। राजनताओ क दवारा किय गय। अतएव कहा जा सकता ह कि अगर हम एक परिषकत राषटर चाहत ह, अगर हम रामराज की सथापना करना चाहत ह तो हम सरवपरथम राजनीति म निहित भरषटाचार को मिटाना होगा।
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