शष यतर उपनयस म असततव क कशमकश
Abstract
असतितववाद पाशचातय जगत की दन ह। यह एक ऐसा दरशन ह जो मनषय क असतितव को महतव दता ह। असतितववादी विचारको की दो विचारधाराए सामन आती ह। एक विचारधारा आसतिक असतितववादियो की ह। य ईशवरवादी दारशनिक अपनी आतमा क भीतर ईशवरीय सतता का अनभव करत ह एव ईशवर को मनषय पर हावी भी नही होन दत। कीरकगारद, जसपरस और मारशल आसतिक असतितववादियो म स परमख ह। नासतिक असतितववादी दारशनिको म जया पाल सातरर, फरडरिक नीतश और मारटिन हीडगर परमख रप स ईशवर क असतितव म विशवास न रखन वाल दारशनिक ह। नीतश तो ईशवर क मरन की घोषणा करत ह। हीडगर न तो यह तक कह दिया कि ईशवर दवारा मनषय इस ससार म फक दिया गया ह। अब उसको सवय अपन कारयो का चनाव करना ह। परतयक वयकति अपनी अलग पहचान एव अपना असतितव चाहता ह। समाज म रहत हए वह अपन असतितव को निखारना चाहता ह लकिन कई बार परिसथितिया ऐसी हो जाती ह कि वह अपनी अभिवयकति क लिए उचित वातावरण नही पाता। तब अपनी परतिकल परिसथितियो को सधारन हत वह हरसभव परयास करन शर कर दता ह। निरनतर सघरषरत रहकर वह हालातो को अनकल करन की कोशिश करता ह एव उचित वातावरण न मिलन पर भी अपन निशचित उददशय की परापति कर लता ह। असतितववादी दारशनिको का मानना ह कि वयकति अपन भागय का निरमाता सवय ह। उसको किसी दसर पर आशरित रहन की आवशयकता नही ह। उषा परियवदा न मानवीय सवदनाओ को सामन लान का भरसक परयास किया ह। उषा परियवदा क शष यातरा उपनयास म मानव क सघरषशील जीवन, सतरास, कठा, अनासथा आदि की अभिवयकति हई ह। आधनिक काल म मानव सवारथपरकता क कारण ही अजनबीपन का शिकार हो गया ह। अकलापन, ऊब, सतरास, कठा, अनासथा, सवततरता, अजनबीपन आदि असतितववाद की सभी विशषताए शष यातरा म दखन को मिलती ह।
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
