लककथओ म लकगत क सयजन एव सतर चतन क सवर
Abstract
लोक कथाए हमारी पराचीन धरोहर ह हमारा आदि साहितय ह इनम हमारी पराचीन भारतीय ससकति सभयता और इतिहास समकित ह | लोक कथाओ म लोक जीवन की झाकी इनम लोगो क सखो -दखो की अभिवयकति होती ह साथ ही य मनोरजन क साथ शरम का परिहार भी करत ह| मनषय परारभ स ही कलपनाशील रहा ह अपनी इसी कलपनाशीलता क कारण वह अपन आसपास की घटनाओ और यथारथ को लोक कथा क रप म कहन लगा | लोककथाए विशव की हर भाषा म होत ह | भारतीय आदिवासी और गरामय जीवन म लोक कथाओ की महतवपरण भमिका ह | य ससकति की वाहक होती ह व ससकति की अनकानक ततवो को एक पीढी स दसरी तक हसतातरित करती ह | कछ लोक कथाए अपन अचल विशष म कही सनी जाती ह कछ अपन अचल स निकल कर लोक जीवन तक पहचती ह तो कछ लोक कथाए थोड परिवरतन क साथ विशववयापी हो जाती ह | लोक कथाओ म लोक गीतो का सयोजन उस और सरस बना दता ह | आधनिकता क परभाव स लोक कथाए विलपति क कगार पर ह आज इनक सकलन अनवषण पनरलखन और विशलषण की आवशयकता ह परसतत शोध- पतर का यही उददशय ह |
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