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हड़य म परयग हन वल औषधय परबध एव परभव (आदवस जनजवन क सदरभ म)

International journal of applied research · 2021 · Vol. 7(3) · pp. 141–142

Abstract

जिस तरह सभयता मनषय क भौतिक कषतर की परगति का सचक ह उसी तरह ससकति मानसिक कषतर की परगति का दयोतक ह। आदिकाल स ही भारत म अनसचित जनजाति क लोग रहत ह-गोड़, भील, सथाल, उराव, सहरिया, नागा, मणडा, बगा इतयादि छः सौ स भी अधिक विभिनन जनजातीय समह यहा निवास करती ह। इनकी सासकतिक विविधता ही हमारी विरासत ह। वनसपति क छाल, जड़, पतती एव फलो का परयोग करक य अपन भोजन का निरमाण सवय करत ह। आदिवासियो दवारा पिया जान वाला विषष शीतल पय हड़िया क निरमाण क लिए परयोग की जान वाली वनसपति कौन-कौन सी ह। किन कारयकरमो म इसका उपयोग किया जाता ह। इसी सोच को मरत रप दन क लिए इस अधययन म शामिल किया गया ह।

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