भरत क वभजत गणरजय क समकष चनतय: एक रजनतक वशलषण
Abstract
पहल गणततर दिवस स ठीक दो दशक पहल, भारतीय राषटरीय कागरस न भारत क लोगो स 26 जनवरी, 1930 को ’परण सवराज’ या ’सवततरता दिवस’ क रप म मनान का आहवान किया था। इसस पहल, 19 दिसबर, 1929 को लाहौर म अपन यवा और करिशमाई अधयकष जवाहरलाल नहर की अधयकषता म अपन ऐतिहासिक सतर म, कागरस न पहली बार ’परण सवराज’ क रप म घोषणा करत हए एक परसताव पारित किया था। भारत न 1947 म सवततरता हासिल की, लकिन यह परी तरह स सवततर नही था। यह अपन सवय क सविधान क बिना अभी भी एक परभतव था। एक महतवपरण अरथ म, परण सवराज ’26 जनवरी 1950 को ही एक वासतविकता बन गई, जब भारत का नया अपनाया गया सविधान लाग हआ और भारत न खद को एक सपरभ, लोकतातरिक गणराजय घोषित किया। यह पतर भारत क विभाजित गणराजय क समकष की चनौतियो पर एक राजनीतिक विशलषण परसतत करन का परयास करता ह।
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