घरऊ घटन क घरल यथरथवद
Abstract
भवनशवर मिशर, हिनदी उपनयास क यथारथवादी धारा क परमख उपनयासकार ह। परव-परमचद यग म जब घटना परधान उपनयासो का बाहलय था। तिलसमी, जाससी और ऐयारी उपनयास की धम थी। ऐस समय म उननीसवी सदी क अत म भवनशवर मिशर क रप म एक ऐस रचनाकार का परारदभाव हआ, जो कलपनारत मनोरजक उपनयास लखन की दिशा को सच की ओर मोड़न का कारय किया। इनहोन यथारथ को अपन लखनी का आधार बनाया। भवनशवर मिशर न दो ही परण उपनयास लिख। ‘घराऊ घटना‘(1893) और ‘बलवत भमिहार‘(1901)। लकिन इन उपनयासो म उनका यथारथबोध सपषट रप स दिखाई दता ह। ‘घराऊ घटना‘(1893) म घरल यथारथ की जो परमाणिक परसतति ह, वह अपन समकालीन उपनयासो क सरदभ म आशचरय पदा करती ह। मिशर जी न अपन उपनयासो म आम आदमी की समसया का समाधान तलाशन का परयास किया ह। इनका मानना ह कि यथारथवादी साहितय ही आधनिक पजीवादी वयवसथा म वयकति क सघरष और यातना को अचछी तरह परसतत कर उसस जड़ सकता ह।
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