article
नरश महत क परबनध कवय म समज चतन क अधययन
International journal of applied research · 2021 · Vol. 7(2) · pp. 89–93
Abstract
नरश महता क परबनध कावय म समाज चतना की उपलबधियो को मलयाकित कर तारकिक समरथन क साथ उदघाटित करना सहज कारय नही ह। कयोकि समाज चतना निरनतर गतयातमक हआ करती ह। किसी अनतिम पड़ाव तक चतना सथिर नही होती। ’’किसी यग की रचनाओ म किसी को कया मिलता ह यह बहत कछ बदलत परिवश क साथ रचनाकार क चिनतनधारा पर कनदरित होता ह। जब एक शोधारथी की हसियत स कोई अनवषी रचना और रचनाकार स तादातमय करता ह तभी समगर वयवसथा की गहरी पहचान कर पाता ह। समाज चतना क हर परयास का कनदर बिनद मानवीय भावना ही ह।
Citations
0
FWCI
0.00
field-weighted impact
References
0
Percentile
2%
vs. same field & year
Citation Network
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
