Scinovex
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जयपर क भततचतरण जनकल

International journal of applied research · 2015 · Vol. 1(2) · pp. 244–246

Abstract

आज जनकला का सवरप अतयधिक सौनदरयपरण एव विशाल ह। यह माना जा सकता ह कि पराचीन समय म इस कला को पबलिक आरट नही कहा जाता था, परनत उसक मायन और उददशय समान थ। जनकला क कई पहल होत ह, जनकला म कलाकार अपना योगदान दता तो ह परनत वह अपनी सोच पर आधारित कति का निरमाण नही करता ह। वह दषटि आयोजक अथवा शासक या अधिकारी की होती ह। यह अलग-अलग लोगो को अलग-अलग आभास दता ह और व निजी सतर पर उसका आनद लत ह।

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