article
अमरत कल क पररदभव (परसथत, अवधरणए, रपरख एव उदगम)
International journal of applied research · 2014 · Vol. 1(1) · pp. 341–342
Abstract
अमरत कला म किसी न किसी रप स कला ततव मौजद रहत ह। अमरत कला स कलाकार अपन विचारो की परसतती करता ह, जो परोकष या अपरोकष रप स समाज म मौजद सामाजिक, धारमिक, वजञानिक आदि आडमबर और विकास को उसक अपन अनभव क आधार पर समझन का परयतन करता ह। साथ ही परकति की अपनी सतता को भी वह समझता ह। कयोकि उसका जनम एव विकास यही हआ ह, तो अमरत कला का जनम एव विकास भी यह हआ ह। हम किसी भी तरह उसको समाज स अलग नही दख सकत।
Citations
0
FWCI
0.00
field-weighted impact
References
0
Percentile
83%
vs. same field & year
Citation Network
How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.
