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वजञपन जनकल क एक सवरप

International journal of applied research · 2016 · Vol. 2(1) · pp. 926–928

Abstract

एक कलाकार की जन उददशय यकत कलाकति खल सथान पर आमजन क बीच परदरशित होती ह तो वह जनकला (पबलिक आरट) कहलायगी और उसी कलाकार की दसरी कति किसी सगरहालय म या सात सितारा होटल म या फिर राषटरपति भवन म परदरशित की जा रही ह तो वो जनकला क अनतरगत नही आयगी भल ही उसम जनहित उददशय भरा पड़ा हो। कयोकि वो कलाकति आमजन की पहच स बहत दर ह, जिस दखन का सौभागय भी आम जनता का नही ह, अगर उसी कति को सथानानतरित कर सारवजनिक खल सथान पर जनता क समकष परदरशित कर दिया जाय तो वह कलाकति जनकला की सजञा धारण कर लती ह।

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