भरत म तवर जनसखय वदध एव अतर पढ़ सघरष: एक समजशसतरय अधययन
Abstract
भारत प्राचीन काल से ही जनसंख्या समूह का प्रधान क्षेत्र रहा है। प्राचीन और मध्य काल में प्राकृतिक आपदाओं, महामारियों, संक्रामक बीमारियों के प्रकोप तथा युद्धों आदि के कारण जनसंख्या की वृद्धि बहुत कम हो पाती थी और अनेक बार तो यह पहले से भी घट जाया करती थी। भारत में जनसंख्या की उल्लेखनीय वृद्धि 20वीं शताब्दी के तीसरे दशक से आरम्भ हुयी और इसकी गति स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् नियोजन काल में अधिक तीव्र हो गयी। चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार तथा महामारियों के नियंत्रण से मृत्युदर में तीव्रता से कमी आती गयी जिससे मृत्युदर 30 प्रति हजार से घटकर 8 प्रति हजार तक आ गयी है किन्तु जन्मदर 35 प्रति हजार से घटकर 26 प्रति हजार तक ही गिर पायी है। इस प्रकार जन्मदर और मृत्युदर के मध्य भारी अंतर के कारण जनसंख्या में तेजी से वृद्धि होने लगी।
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