article
नथदवर चतरकल क सवरप
International journal of applied research · 2016 · Vol. 2(1) · pp. 889–890
Abstract
शोध पतर का साराष इस रप म उभर कर आता ह कि नाथदवारा चितरकला को किसी षलीगत परारप म निबदव नही कर यदि उसका वहद रप भारतीय कला क उस रप म आकलन किया जाय जिसम भारतीय कला का मल रप औचितयवाद रहा ह तो नाथदवारा चितरकला अपन आपम वयकतिक एव विषिषट रप म परसथापित होती ह।
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