Scinovex
article

वषणव भकत कव सरदस क भकत सधन

International journal of applied research · 2017 · Vol. 3(7) · pp. 1064–1065

Abstract

हिदी साहितय म भारतीय साधना क सवरप की एक अदवितीय परपरा रही ह। यजञ, तप, जञान, योग और भकति क रप म साधना की अजसर धारा वदिक काल स आज तक निरनतर परवाहित ह। भकति सदव मानव की सहज और सरल परकति क साथ अभिवयकत होती रही ह। शरीमदभागवद गीता म निषकाम भकति योग को भगवद परापति का सरलतम साधन माना ह। इसक पशचात भागवत धरम क अनतरगत भकति परपरा का विकास करम निरनतर जारी रहा जो दकषिण भारत क ‘आलवार’ वषणव भकतो स परारभ होकर समपरण उततर भारत म फल गया और यह वषणव भकति साहितय का पराण ततव बना। उततर भारत म वषणव भकति को परचलित करन म सवामी रामानद और सवामी बललभाचारय का विशष योगदान रहा। इसी परपरा म सवामी बललभाचारय दवारा परवरतित कषण भकतिधारा क सरवाधिक परसिदध कवि सरदास हए जो अषटछाप क सरवशरषठ कवि एव पषटिमारग क जहाज कहलाए। वषणव भकत कवि सरदास न भकतिसाधना क लिए परमततव को परमखता दी। व शरीमदभागवत म वरणित अकाम और सकाम दोनो परकार की भकति को सवीकारत ह साथ ही नवधा भकति का मनोयोगपरवक अपन साहितय म वरणन करत ह। उनकी भकतिसाधना वषणवी ह। व इस कषतर क उचच कोटि क कवि ह। भकति उनकी रग-रग म समाई हई ह, व कहत ह- ‘‘ र मन मरख जनम गवायौ। करि अभिमान विषय रस गीधयौ, सयाम सरन नहि आयौ।’’ यह सपषट ह कि सरदास वषणव भकत कवियो म अपना शीरष सथान रखत ह।

Citations
0
FWCI
0.00
field-weighted impact
References
0
Percentile
68%
vs. same field & year
Citation Network

How this paper connects to the literature. Drag to explore, click any node to open that paper.

वषणव भकत कव सरदस क भकत सधन · Scinovex