परणय जल गरमण महलओ क वकस म सरकर यजनओ क भमक: एक समजशसतरय अधययन
Abstract
किसी भी दश क विकास का आकलन उस दश की जनता क जीवन सतर स किया जाता ह। सामानयतः जनता क जीवन सतर म समाज क कमजोर वरग और महिलाओ क जीवन सतर क मानक विशष रप स उललखनीय ह। लगभग सभी विकासशील दशो म महिलाए समाज का कमजोर हिससा ह और परयासो क बावजद उनकी सथिति बद स बदतर होती जा रही ह। हमार अपन भारतीय परसग म जवाहरलाल नहर की मानयता थी कि महिलाओ की सथिति ही दश क वासतविक सवरप का परिचायक ह। डॉ. बी.एम. शरमा (1999) का कहना ह मानव सभयता क ऊषाकाल स ही मानव समाज क निरमाण एव विकास म महिलाओ की महतवपरण भमिका रही ह, अथवा य कह कि समाज क निरमाण एव विकास को सजान एव सवारन म परषो की अपकषा महिलाओ की भमिका अधिक रही ह तो कोई अतिशयोकति नही होगी। वासतविकता यह ह कि कोई भी समाज महिला वरग की भमिका एव महता को नजरअदाज कर विकास की दौड़ म आग नही आ सकता।
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