Scinovex
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समकलन हनद कथ-सहतय म परसर-वमरश

International journal of applied research · 2020 · Vol. 6(6) · pp. 173–174

Abstract

समाजिक सरोकारो स लस बदधिजीवियो और कारयकरताओ क बीच लब समय स यह लगातार चरचा और चिता का विषय रहा ह कि ‘समकालीन हिनदी कथा-साहितय अनक विमरशो सहित ‘परिसर-विमरश’ स भी सबधित ह, जिस परकार हिनदी कथा-साहितय, जिस कथा, कहानी, आलोचना, कविता इतयादि मानवीय सवदनाओ की वाहक विधा क रप म दखा जाता ह वह दलित, सतरी, अलपसखयक तथा अनय हाशिए क विमरशो को किस रप म चितरित करता ह? साहितय अपन यरथाथवादी होन क दाव क बावजद इन मल अवधारणाओ को रखाकित कर उस पर आम जन क बीच किसी किसम की सवदना को विकसित कर पान म सफल हो पाया ह?

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समकलन हनद कथ-सहतय म परसर-वमरश · Scinovex